उर्दू ग़ज़ल के शहंशाह डॉ. बशीर बद्र (91) नहीं रहे। उन्होंने गुरुवार दोपहर 12:15 बजे भोपाल में फानी दुनिया को अलविदा कहा। उर्दू अदब की रूह में समाए बशीर बद्र तक़रीबन 14 बरस डिमेंशिया की गिरफ़्त में रहे, जिससे उनकी याददाश्त कमजोर होती चली गई, मगर उनके शेर आज भी दिलों में धड़कते हैं। उनको शाम 7:30 बजे भोपाल टॉकीज के पास कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया गया। उनकी पत्नी, डॉ. राहत बद्र, जब उनके शेर गुनगुनातीं, तो बशीर साहब के चेहरे पर शादाबी की हल्की सी झलक उभर आती थी। कभी-कभी वे ख़ुद भी मिसरा पूरा करने लगते। एक वक़्त था, जब उनके बिना मुशायरे अधूरे माने जाते थे। उनकी मौजूदगी महफ़िल की कामयाब
शायर बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन:याददाश्त चली गई थी, मुशायरे की याद आने पर इरशाद-इरशाद कहने लगते थे
उर्दू ग़ज़ल के शहंशाह डॉ. बशीर बद्र (91) नहीं रहे। उन्होंने गुरुवार दोपहर 12:15 बजे भोपाल में फानी दुनिया को अलविदा कहा। उर्दू अदब की रूह में समाए बशीर बद्…
