इंदिरा गांधी तब प्रधानमंत्री बनी ही थीं और यह अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही मुश्किल दौर था. भारत छह साल के भीतर दो युद्ध का सामना कर चुका था. अमेरिका और वर्ल्ड बैंक भारत को लेकर उदार नहीं थे. ऐसे में क्या भारत के पास कोई और विकल्प नहीं था?