नीट पेपर लीक मामले में CBI जांच में पता चला है कि गिरोह ने परिजन की आर्थिक स्थिति देखकर 5 से 50 लाख रुपए तक में पेपर बेचा। बाकी रकम की गारंटी के लिए ब्लैंक चेक और छात्रों के डॉक्यूमेंट रखे जाते थे। वहीं जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी महाराष्ट्र का कोचिंग डायरेक्टर 8 एकड़ जमीन पर स्कूल-कॉलेज खोलने की तैयारी में था। CBI जांच के मुताबिक, पेपर की कोई तय कीमत नहीं थी। सौदा हर परिवार की आर्थिक स्थिति देखकर तय किया जाता था। पूरी रकम पहले नहीं ली जाती थी। सिर्फ टोकन मनी ली जाती थी। डील यह थी कि आंसर-की आने के बाद अगर यह साबित हो जाए कि दिया गया ‘क्वेश्चन बैंक’ असली पेपर से मेल खाता है, तब