हाईकोर्ट ने भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना और कहा कि विवादित स्थल के स्वरूप के निर्धारण में आस्था, ऐतिहासिक रिकॉर्ड, एएसआई रिपोर्ट और पूजा की निरंतरता जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाना चाहिए।