सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (NJA) ने एक गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक जजों को रेप, सेक्शुअल हैरेसमेंट जैसे मामलों की सुनवाई और फैसले लिखते समय कुछ सावधानियां बरतने कहा गया है। एक्सपर्ट कमेटी के मुताबिक जजों को पीड़ित के चरित्र, कपड़ों, जीवनशैली, नैतिक धारणाओं के बजाय केवल सबूतों पर फैसला देने की सलाह दी गई है। साथ ही लज्जा भंग, प्रोसिक्यूट्रिक्स (अभियोजन पक्ष की शिकायतकर्ता), बेबस महिला, हवस, इज्जत, शर्म और पवित्रता जैसे शब्दों के इस्तेमाल से बचने को कहा गया है। NJA ने "ज्यूडीशियल सेंसिटिविटी हैंडबुक" तैयार की है। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2026 में इसे
अदालतें लज्जा भंग-हवस जैसे शब्दों का इस्तेमाल न करें:जज चरित्र-कपड़ों पर नहीं, सबूतों पर फैसला दें; दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई के लिए गाइडलाइन
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (NJA) ने एक गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक जजों को रेप, सेक्शुअल हैरेसमेंट जैसे मामलों की सुनवाई और…
