जानकारों का मानना है कि कुछ गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल मनी लॉन्ड्रिंग का ज़रिया बनकर रह गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि 2022 से 2024 के बीच 3,200 से ज्यादा गैर मान्यता प्राप्त दलों को 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजनीतिक चंदा मिला.