शिमला समझौते से लेकर चुनावी मंचों और सोशल मीडिया तक, बशीर बद्र के शेर दशकों तक लोगों की ज़िंदगी और सियासत का हिस्सा बने रहे. डिमेंशिया से जूझ रहे बशीर बद्र आख़िरी दिनों में लोगों को पहचान नहीं पाते थे.