धार की ऐतिहासिक भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की नई गाइड लाइन लागू होने के बाद रविवार को विधिवत पूजा-अर्चना की गई। भोज उत्सव समिति और हिंदू समाज के लोगों ने सूर्योदय के साथ ही मां वाग्देवी की आराधना की और सुबह 11:45 बजे आरती की। रविवार सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां वाग्देवी के चित्र लेकर भोजशाला पहुंचे। समिति ने सबसे पहले परिसर को गोमूत्र से शुद्ध किया। इसके बाद गर्भगृह को रंगोली से सजाया गया। परिसर के बाहर स्थित ज्योति मंदिर की अखंड ज्योत को भी गर्भगृह में स्थापित किया गया। इसके साथ ही सूर्योदय से ही मंत्रोच्चार, देवी अनुष्ठान और वास्तु पूजन शुरू हो
गोमूत्र से भोजशाला शुद्धकर गर्भगृह में स्थापित की अखंड ज्योत:ASI की नई गाइडलाइन के बाद पहली बार मां वाग्देवी की आराधना
धार की ऐतिहासिक भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की नई गाइड लाइन लागू होने के बाद रविवार को विधिवत पूजा-अर्चना की गई। भोज उत्सव समिति और हिंदू…
