हवा में उड़ती गरम राख, गोबर के कंडों (उपलों) से सुलगती 9 धूणी (अग्निकुंड) और उनके ठीक बीचों-बीच, तपते हुए अंगारों के घेरे में शांत मुद्रा में बैठी एक विदेशी महिला। यह कोई आम नजारा नहीं, रूस से आईं योगिनी अन्नपूर्णा नाथ की 'अग्नि तपस्या' है। उन्होंने राजस्थान आकर नाथ संप्रदाय की दीक्षा ली थी। 3 मई को शुरू हुई यह तपस्या 25 मई तक चलने वाली है। रोज सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक अन्नपूर्णा नाथ तपस्या करती हैं। दैनिक भास्कर की टीम इस योगिनी से मिलने पुष्कर (अजमेर) पहुंची। उनसे जाना कि आखिर इस कठोर अग्नि तपस्या को कैसे कर पा रही हैं, इसका मकसद क्या है? 'पिन-ड्रॉप साइलेंस' और कंटीले तारों का घेरा अज