बिहार के सुपौल जिले के 75 वर्षीय मोहन मंडल गांव में बुजुर्गों के एक समूह का हिस्सा हैं। इसमें हमउम्र साथी एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं और सरकारी योजनाओं से जुड़ने में मदद करते हैं। मोहन को भी एक साथी ने इलाज के लिए ‘वय वंदना कार्ड’ बनाने के लिए प्रेरित किया। उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह कार्ड कभी उनकी जिंदगी बचाएगा। कुछ दिन बाद ही मोहन मंडल को ब्रेन स्ट्रोक आया। इलाज का खर्च लाखों रुपए था। ऐसे समय में गांव के ग्रुप ने परिवार को योजना में सूचीबद्ध अस्पताल तक पहुंचाया। वहां उनका ऑपरेशन हुआ। तीन लाख रुपए खर्च हुए। आज मोहन स्वस्थ हैं। अब दूसरे बुजुर्गों को भी जरूरत के खर