रातों-रात अखबारों की बिजली काट दी गई थी। अगले दिन अखबार का संपादकीय पन्ना खाली था। लोगों के बोलने, लिखने और विरोध करने का अधिकार छीन लिया गया था।
50 साल बाद भी आपातकाल के जख्म ताजा: जब बोलना भी था जुर्म, रातों-रात अखबारों की काट दी गई थी बिजली
रातों-रात अखबारों की बिजली काट दी गई थी। अगले दिन अखबार का संपादकीय पन्ना खाली था। लोगों के बोलने, लिखने और विरोध करने का अधिकार छीन लिया गया था।…
