'पूरी बिल्डिंग में धुआं भरा था। पिछली दीवार और खिड़कियां तोड़ी गईं। ब्रीदिंग ऑपरेटस (ऑक्सीजन मास्क) लगाकर रस्सी के सहारे सेकेंड फ्लोर पर पहुंचा गया। धुएं की वजह से विजिबिलिटी जीरो थी। टॉर्च की रोशनी भी काम नहीं कर रही थी। अंदाजे से आगे बढ़ा जा रहा था। भीतर जाकर शीशे तोड़े गए। इससे बिल्डिंग से धुआं बाहर निकलना शुरू हुआ। इसके बाद हेड हॉपर स्टूडियो के अंदर पहुंचे। कई बार ऐसा हुआ कि किसी व्यक्ति के शरीर से पैर टकराने के बाद पता चला कि वहां कोई पड़ा है। अंदर केबिन और वॉशरूम में एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए लाशें पड़ी थीं। किसी का सिर एक तरफ और शरीर दूसरी तरफ झुका था। एक युवक ने मुंह पर हाथ
लखनऊ अग्निकांड- एक-दूसरे का हाथ पकड़े मिलीं लाशें:अंदर विजिबिलिटी जीरो, टॉर्च काम नहीं कर रही थी; रेस्क्यू करने वालों की जुबानी
‘पूरी बिल्डिंग में धुआं भरा था। पिछली दीवार और खिड़कियां तोड़ी गईं। ब्रीदिंग ऑपरेटस (ऑक्सीजन मास्क) लगाकर रस्सी के सहारे सेकेंड फ्लोर पर पहुंचा गया। धुएं की …
