रायपुर के 53 वर्षीय किसान अश्विनी बांधे का दावा है कि जिस जमीन पर आज स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग और गार्डन बने हैं, वह उनकी है। बांधे के मुताबिक यह जमीन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने अस्थायी तौर पर ली थी। उनका कहना है कि युद्ध खत्म होने के बाद यह जमीन लौटाई जानी थी। इसी दावे के आधार पर वे 35 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। साल 2026 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोबारा जांच करने के आदेश दिए। वहीं किसान का कहना है कि सक्षम अधिकारी पहले ही जांच कर चुके हैं। इस आधार पर जून 2026 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई और करीब 3500 करोड़ के मुआवज