इतिहासकार मुनिस डी फ़ारूक़ी ने मुग़ल दौर के हज़ारों दस्तावेज़ों और रिकॉर्ड की स्टडी की है. उनके मुताबिक़, इन दस्तावेज़ों में बड़े पैमाने पर धार्मिक धर्मांतरण के बहुत कम उल्लेख मिलते हैं. साथ ही, ये रिकॉर्ड औरंगज़ेब, उनके दरबार और शाही परिवार की भूमिका की एक नई तस्वीर पेश करते हैं.