कंधे पर गंगाजल लेकर कई दिनों तक पैदल सफ़र करने वाली इस यात्रा में अक्सर ही पुरुष चेहरे नज़र आते हैं. लेकिन वक़्त के साथ इसमें महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है.