भारत के महिला समूहों और सामाजिक संगठनों से जुड़े क़रीब पांच सौ लोगों ने 'महिला आरक्षण' और 'परिसीमन' से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों पर सवाल उठाए हैं.