यह मान लेना सही नहीं होगा कि जंतर मंतर पर मौजूद हर प्रदर्शनकारी आंबेडकरवादी था या अभिजीत दीपके के विचारों से पूरी तरह सहमत था. इसके बावजूद वहां डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें और पोस्टरों की मौजूदगी अहम संदेश देती है.