90के दशक के बाद देश में भर में क्षेत्रीय पार्टियों का उभार हुआ. इनके बिना दिल्ली में सरकार नहीं बनती थी. लेकिन 2014 के बाद क्षेत्रीय दलों का कमज़ोर होना जो शुरू हुआ, वो अभी थमा नहीं है.