सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि दो अविवाहित बालिगों के बीच सहमति से बने शारीरिक संबंध को किसी व्यक्ति के चरित्र पर सवाल उठाने का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है, जो दो बालिग और अविवाहित लोगों को अपनी पसंद का संबंध रखने से रोकता हो। रिश्ता टूटने को धोखा नहीं माना जा सकता। जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह टिप्पणी तेलंगाना स्टेट लेवल पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड के एक मामले की सुनवाई के दौरान की। बोर्ड ने आरोपी को नैतिक दोषी मानते हुए उसकी भर्ती रद्द कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कैंडिडेट को पुलिस में नियुक्ति देने का निर्देश दिया।