पंजाब कांग्रेस में जारी गुटबाजी को थामने के इरादे से आए प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल की कोशिशें पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं। बघेल ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के साथ मिलकर 9 दिनों में 18 ताबड़तोड़ रैलियां और बैठकें कीं। इन कार्यक्रमों में संगठन को मजबूती मिलने के बजाय अंदरूनी कलह और खुलकर सामने आ गई। लगभग हर रैली में जमीनी स्तर के कार्यकर्ता आपस में भिड़ते रहे, धक्कामुक्की और नारेबाजी का दौर चलता रहा। जबकि, प्रभारी बघेल पूरे मामले पर मूकदर्शक बने रहे। उन्होंने एक बार भी आक्रोशित कार्यकर्ताओं को रोकने या समझाने की पहल नहीं की। जहां बघेल के पिछले दौर