“पेपर तो दोबारा करा लोगे, लेकिन मेरी बेटी को लौटा पाओगे क्या?… वो आज भी मेरी आंखों के सामने खड़ी हो जाती है। कहती है- मां मुझे माफ कर देना। मैं डॉक्टर नहीं बन पाई। आपके और पापा के सपने पूरे नहीं कर पाई। मेरी बच्ची का क्या कसूर था? क्या गरीब परिवार में जन्म लेकर डॉक्टर बनने का सपना देखना ही उसका गुनाह था?” यह कहते-कहते नीलम चतुर्वेदी फफक पड़ती है। शब्द गले में अटक जाते हैं। आंसू रुकने का नाम नहीं लेते। नीट पेपर लीक मामले के बाद नागपुर में सुसाइड करने वाली मऊगंज की छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी के घर में 11 दिन बाद भी मातम पसरा हुआ है। दैनिक भास्कर की टीम जब परिवार का हाल जानने उनके घर
‘पेपर दोबारा करा लोगे, बेटी लौटा पाओगे?’:NEET पेपर लीक में बेटी खो चुकी मां का सवाल; पिता बेटी का अंतिम संस्कार भी नहीं देख पाए
“पेपर तो दोबारा करा लोगे, लेकिन मेरी बेटी को लौटा पाओगे क्या?… वो आज भी मेरी आंखों के सामने खड़ी हो जाती है। कहती है- मां मुझे माफ कर देना। मैं डॉक्टर नह…
