संघ के एक प्रचारक के हमें बताया कि इस बार के चुनाव में आरएसएस से जुड़े सैकड़ों स्वयंसेवक और कार्यकर्ता एक ही संदेश के साथ गली‑गली पहुंचे, यह चुनाव बंगाल के हिंदू समाज के "अस्तित्व" से जुड़ा है. आलोचकों का कहना है कि चुनाव को अस्तित्व की लड़ाई के रूप में पेश कर धार्मिक ध्रुवीकरण को तेज़ किया गया.