इन चुनावों की शुरुआत से ही बंगाल का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। एक ओर ममता बनर्जी का ‘अजेय’ माना जाने वाला संगठनात्मक ढांचा था, तो दूसरी ओर भाजपा की आक्रामक चुनाव मशीनरी।