लगभग छह दशकों से डीएमके और एआईएडीएमके बारी-बारी से सत्ता में आती रही हैं. विजय ने इस दौर को ख़त्म कर दिया है, लेकिन अपने किए वादों पर खरे उतरने की परीक्षा अभी बाक़ी है.