अमेरिका और चीन, दोनों ही, उन इलाक़ों तक पहुंच चाहते हैं जहां संसाधन सबसे ज़्यादा हैं, यानी चांद की सबसे क़ीमती ज़मीन पर क़ब्ज़ा जमाना.